आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष - कारण और परिणाम

 B.A. III, History I / 2020 
प्रश्न 1. भारत में आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष के क्या कारण थे
अथवा , भारत में आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष में फ्रांसीसियों के विरुद्ध अंग्रेजों की सफलता के कारणों की व्याख्या कीजिए। 
अथवा , दक्षिण में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए आंग्ल-फ्रांसीसी प्रतिस्पर्धा में फ्रांसीसियों की पराजय के कारणों की विवेचना कीजिए।
अथवा , भारत में 1740 से 1757 ई. के मध्य अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों की प्रतिस्पर्धा का विवरण दीजिए।

उत्तर - अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य संघर्ष के कारण

अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य संघर्ष के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे

(1) पारस्परिक व्यापारिक प्रतिस्पर्द्धा -

अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य । संघर्ष का प्रमुख कारण उनकी आपसी व्यापारिक स्पर्धा थी। दोनों ही कम्पनियों की आकांक्षा थी कि वे भारत के विदेशी व्यापार पर एकाधिकार स्थापित कर लें।

(2) राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा -

 अंग्रेजों और फ्रांसीसियों, दोनों का उद्देश्य एक-दूसरे को भारत से निकालकर अपनी-अपनी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएँ पूरी करना था। भारत की राजनीतिक स्थिति से अंग्रेज और फ्रांसीसी, दोनों अधिकाधिक लाभ उठाना चाहते थे।

(3) फ्रांस तथा इंग्लैण्ड के मध्य औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा-

यूरोपीय राजनीति की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रतिध्वनि भारतीय क्षेत्रों में अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों को अप्रभावित नहीं छोड़ती थी। यद्यपि भारत की तत्कालीन परिस्थितियों का भी इसमें योग रहता था। इस समय ये दोनों राष्ट्र एक-दूसरे के प्रबल विरोधी थे। फ्रांस यूरोप में प्रभुत्व स्थापित करने को उद्विग्न था और इंग्लैण्ड शक्ति सन्तुलन बनाए रखने के लिए फ्रांसीसी प्रयत्नों का विरोधी था। इन दोनों के मध्य गहरी औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा भी थी। अत: उनमें युद्ध छिड़ना अनिवार्य हो गया था। दोनों राष्ट्रों का आपसी बैर-विरोध उन्हें हर जगह संघर्ष के लिए मजबूर कर रहा था।

फ्रांसीसियों की असफलता के कारण

अंग्रेजों के विरुद्ध फ्रांसीसियों की असफलता के अनेक कारण थे, जो निम्न प्रकार हैं

डूप्ले की नीति-

(1) व्यापार सम्बन्धी नीति प्रारम्भ में डूप्ले भी अन्य यूरोपीय लोगों की भाँति अपने देश के व्यापार की अभिवृद्धि का उद्देश्य लेकर भारत आया था। किन्तु कुछ समय पश्चात् ही उसकी व्यापार में अरुचि हो गई। दूसरे उसने यह भी अनुभव किया कि अंग्रेजी व्यापार के आगे उसका ठहरना सम्भव नहीं। इन्हीं सब कारणों से उसने व्यापार के स्थान पर भारत पर अधिकार करके अपने देश को समृद्धशाली बनाने की सोची।
(2) साम्राज्य स्थापना की नीति - डूप्ले को जन्म से ही राजनीति से प्रेम था। इसलिए उसने भारत आने पर यहाँ की राजनीतिक स्थिति का अध्ययन बड़े मनोयोग से किया और अन्त में वह इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि भारत में फ्रांसीसी सत्ता सरलतापूर्वक स्थापित की जा सकती है।
(3) अंग्रेजों की शक्ति का दमन- वह अंग्रेजों का कट्टर शत्रु था। वह "किसी-न-किसी प्रकार भारत से अपने शत्रुओं को निकालने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ था।
(4) भारतीय शासकों के झगड़ों में हस्तक्षेप की नीति - डूप्ले एक कूटनीतिज्ञ था। उसने सोचा कि भारतीय राजाओं के झगड़ों में हस्तक्षेप करके एवं किसी शक्तिशाली राजा से दोस्ती करके एक सुदृढ़ शक्ति की व्यवस्था की जा सकती है, तब अंग्रेजों को भारत से भगाना बड़ा आसान हो जाएगा।

 डूप्ले की नीति के परिणाम

(1) सफलताएँ - 

सबसे पहले उसने मद्रास पर अपना अधिकार जमाया। इसके पश्चात् कर्नाटक के नवाब को हराकर उस पर अपना अधिकार किया। उसने भारतीय नरेशों के झगड़ों में हस्तक्षेप की नीति द्वारा हैदराबाद तथा कनाटक पर अपना आधिपत्य स्थापित किया।

(2) विफलताएँ -

प्रारम्भ में डूप्ले को अपने उद्देश्य से सम्बन्धित अनेक सफलताएँ प्राप्त हुईं, किन्तु 1751 ई. में उम्का भाग्य दुर्भाग्य में बदल गया। क्लाइव की अर्काट विजय से डूप्ले की सफलताओं पर पानी फिर गया।

फ्रांसीसियों की असफलता के अन्य कारण

(1) व्यापार की दयनीय स्थिति

अंग्रेजों की तुलना में फ्रांसीसी व्यापार की स्थिति बहुत दुर्बल थी। अंग्रेजों का अकेले बम्बई में ही इतना विस्तृत व्यापार था कि कई फ्रांसीसी बस्तियों का व्यापार मिलकर भी उसका मुकाबला नहीं कर सकता था। अंग्रेजों ने कभी व्यापार की उपेक्षा नहीं की। ।

(2) सामुद्रिक शक्ति-

अंग्रेजों की सेना जहाजी बेड़े से सुसज्जित थी। अत: फ्रांसीसी सेना उसका मुकाबला नहीं कर सकी।

(3) कम्पनी पर सरकारी नियन्त्रण-

अंग्रेजी कम्पनी व्यक्तिगत व्यापारिक कम्पनी थी, जबकि फ्रांसीसी सरकारी व्यापारिक कम्पनी। इस कारण अपनी आर्थिक सहायता के लिए उसे फ्रांसीसी सरकार पर आश्रित रहना पड़ता था।.

(4) फ्रांसीसियों में एकता की भावना का न होना-

प्राय: भारत में अंग्रेज अफसर और सेनापति सदैव ही पारस्परिक विश्वास और एकता के साथ कार्य करते थे। इसके विपरीत फ्रांसीसी अफसरों में बहुधा द्वेष भाव व स्वार्थपरता रहती थी।

(5) योग्य सेनापतियों का अभाव-

फ्रांसीसी सेना में योग्य सेनापतियों का अभाव था। सेनापति अयोग्य एवं रण कौशल में कुशल नहीं थे, जबकि अंग्रेजों का सैन्य संगठन उच्च कोटि का था। सभी सैनिक अनुशासित एवं रण विद्या में कुशल थे।

(6) डूप्ले का फ्रांस वापस बुलाया जाना -

यह फ्रांसीसी सरकार का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि उसने डूप्ले के विचारों को जानने या सम्मान देने की आवश्यकता महसूस नहीं की और उसे फ्रांस ऐसे समय बुला लिया जबकि भारत में उसकी आवश्यकता थी।

(7) भारतीय नरेशों की मित्रता से हानि

डूप्ले को चान्दा साहब की मित्रता से धोखा मिला। चान्दा साहब ने उसकी इच्छा के विरुद्ध त्रिचनापल्ली पर चढ़ाई विजय के लिए नहीं, वरन् तंजौर की धनराशि प्राप्त करने के लिए कर दी। इससे त्रिचनापल्ली पर शीघ्र विजय प्राप्त नहीं की जा सकी। जब चान्दा साहब ने त्रिचनापल्ली का घेरा डाला, तो उसने डूप्ले की इच्छा के विरुद्ध आधी सेना अर्काट भेज दी, जिसका सन्तोषजनक फल नहीं मिला।

एच. एच. डॉडवैल के अनुसार, "सामुद्रिक शक्ति का प्रभाव ही मुख्य कारण था, जो अंग्रेजों की सफलता का कारण बना। यद्यपि फ्रांसीसी बेड़ा कभी भी । पूर्णरूपेण नष्ट नहीं हुआ, परन्तु तीन झड़पों के फलस्वरूप अंग्रेजों को अजेय वरिष्ठता प्राप्त हो गई। ......' अंग्रेजों को बंगाल से धन तथा रसद, यूरोप से नई भर्ती की हुई सेना तथा उत्तरी प्रदेशों से अन्न मिलता रहा, परन्तु फ्रांसीसियों को यह सब नहीं मिल सका। बहुत कठिनाई से थल मार्ग से केवल कुछ अन्न प्राप्त हो सका। पहले (अंग्रेज) निरन्तर शक्तिशाली बनते चले गए और दूसरे (फ्रांसीसी) निरन्तर शक्तिहीन। इस प्रकार कूट को लाली पर वरिष्ठता प्राप्त हो गई तथा वह पॉण्डिचेरी की परिधि में ही सिमटकर रह गया।"

Question 1. What were the reasons for the Anglo-French conflict in India? B.A. III, History I
Or, Explain the reasons for the success of the British against the French in the Anglo-French conflict in India. 
Or, Discuss the reasons for the defeat of the French in Anglo-French competition to establish dominance in the South.
Or, Give a description of the competition between the British and the French in India between 1740 and 1757 AD.

Answer: Due to the conflict between the British and the French

Following were the main reasons for the conflict between the British and the French

(1) Mutual Business Competition -

Between the British and the French. The main reason for the conflict was their mutual business competition. Both companies aspired to establish a monopoly on India's foreign trade.

(2) Political ambition -

 Both the British and the French aimed to expel each other from India and fulfill their political ambitions. Both the British and the French wanted to get the most out of the political situation in India.

(3) Colonial competition between France and England-

The direct and indirect resonance of European politics did not leave the British and the French unaffected in Indian territories. Although the conditions of India were also there in it. At this time these two nations were strongly opposed to each other. France was anxious to establish dominance in Europe and England was opposed to French efforts to maintain the balance of power. There was also deep colonial competition between these two. Therefore, it became compulsory to wage war. The mutual antagonism of the two nations was forcing them to struggle everywhere.

 Due to failure of French

Or

 Due to the success of the British against the French

There were several reasons for the failure of the French against the British, which are as follows

 Duple's policy

(1) Trade related policy - 

Initially Duple also came to India with the aim of promoting the trade of his country like other Europeans. But after some time, he became uninterested in business. Secondly he also felt that it is not possible to stay in front of English business. For all these reasons, he thought of making India prosperous by occupying India at the place of trade.

(2) Policy of Establishing Empire -

Duple loved politics from birth. Therefore, when he came to India, he studied the political situation here with great intent and in the end he came to the conclusion that French power can be easily established in India.

(3) Suppression of British power -

He was a staunch enemy of the British. He was "determined to somehow eject his enemies from India."

(4) Duple was a diplomat -

a policy of interference in the quarrels of the Indian rulers. He thought that a strong power could be arranged by interfering in the quarrels of the Indian kings and befriending a powerful king, then it would be much easier to drive the British out of India.

 Dupley's policy results

(1) Successes -

 First he asserted his authority over Madras. After this, he defeated the Nawab of Karnataka and took control over him. He established his suzerainty over Hyderabad and Karnataka by a policy of interference in the quarrels of the Indian king.

(2) Failures - 

Initially Duple had many successes related to his purpose, but in 1751 AD Uma's fate turned into bad luck. Clive's Arcot victory defied Duple's successes.

Other reasons for the failure of the French

(1) Pity of business -

The French trade situation was much weaker than that of the British. The British had such a wide trade in Bombay alone that even the trade of many French settlements could not compete together. The British never neglected trade. .

(2) Maritime power-

The British army was equipped with the ship fleet. Therefore, the French army could not compete with him.

(3) Government control over the company-

The English company was an individual trading company, while the French government trading company. For this reason, he had to depend on the French government for its financial assistance.

(4) Lack of unity among the French.

Often British officers and generals in India always worked with mutual trust and unity. French officers, in contrast, often had hostility and selfishness.

(5) Lack of qualified generals-

The French army lacked qualified generals. The generals were unfit and not skilled in battle skills, while the British military organization was of a high order. All the soldiers were disciplined and skilled in battle.

(6) Dupleix being recalled to France -

It can only be said to be a misfortune of the French government that it did not feel the need to know or respect the views of Dupleix and called him to France at a time when he was needed in India.

(7) Loss of friendship of Indian kings -

Duple was betrayed by the friendship of Chanda Sahib. Chanda Sahib marched against her will not to conquer Trichinapalli for victory, but to obtain the money from Tanjore. With this, Trichnapalli could not be conquered quickly. When Chanda Saheb besieged Trichinapalli, he sent half the army to Arcot against Duple's will, which did not yield satisfactory results.

According to HH Dodwell, "the influence of maritime power was the main reason that led to the success of the British. Although the French fleet never. Completely destroyed, the three skirmishes led to the British invincible seniority. ...... 'The British continued to get money and logistics from Bengal, newly recruited army from Europe and food from the northern regions, but the French could not get it all. With difficulty, only a few grains could be obtained from the land route. The first (English) continued to become powerful and the second (French) continued to be powerless. Thus the code gained seniority over redness and remained confined to the periphery of Pondicherry. . "


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