लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में अंतर

M.J.P.R.U-B.A-III-Political Science -I 

प्रश्न 3. लोक प्रशासन किसे कहते हैं ? यह किस प्रकार निजी प्रशासन से भिन्न है
अथवा '' लोक प्रशासन एवं निजी प्रशासन के भेद को समझाइए।
अथवा '' लोक प्रशासन एवं व्यक्तिगत प्रशासन की तुलना कीजिए।
अथवा '' लोक प्रशासन और व्यक्तिगत प्रशासन में समानताएँ तथा असमानताएँ बताइए।

उत्तर- लोक प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषाएँ - (नोट-इसप्रश्न के उत्तर के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न सं. 1देखिए।)

लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन की तुलना :-

यद्यपि निजी प्रशासन तथा लोक प्रशासन, दोनों जनता के वर्ग या वर्गों से सम्बन्ध रखते हैं, परन्तु लोक प्रशासन का क्षेत्र निजी प्रशासन की अपेक्षा बहुत विस्तृत होता है। दोनों प्रशासनों में बहुत कुछ समानता होते हुए भी व्यापक अन्तर होता है। साइमन के मतानुसार, "लोक प्रशासन में नौकरशाही होती है, जबकि निजी प्रशासन में व्यावसायिक पुट होता है। लोक प्रशासन का आधार राजनीतिक होता है, किन्तु निजी प्रशासन गैर-राजनीतिक आधारों पर निर्मित होता है। 'लालफीताशाही' लोक प्रशासन की विशेषता है, किन्तु निजी प्रशासन में उसके लिए कोई स्थान नहीं होता।"

लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में समानताएँ:-

लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में समानताएँ निम्नवत् हैं

(1) संगठन का महत्त्व :-

सुदृढ़ संगठन ही संस्था की सफलता की कुंजी है। अतः चाहे लोक प्रशासन हो या निजी प्रशासन, संगठन का महत्त्व दोनों के लिए समान है। दोनों प्रकार के प्रशासनों के उद्देश्यों की पूर्ति का साधन उनका सुदृढ़ संगठन ही है।
lok aur niji prashashan me antar

(2) उत्तरदायित्व की भावना:-

उत्तरदायित्व ही प्रशासन को जन्म देता है। निजी प्रशासन हो या लोक प्रशासन, किसी-न-किसी के प्रति उत्तरदायी अवश्य होता है। निजी प्रशासन एक व्यक्ति या कुछ व्यक्तियों के प्रति उत्तरदायी होता है, जबकि लोक प्रशासन जनता या जनता द्वारा चयनित संसद के प्रति उत्तरदायी होता है।

(3) प्रगति एवं विकास :-

संस्था निजी हो या सरकारी, उसके संगठन की सुदृढ़ता ही उसमें प्रगति बनाए रखती है। जब तक आन्तरिक संगठन अथवा प्रशासन मजबूत है, तब तक संस्थाएँ बराबर प्रगति करती जाती हैं। यह प्रगति या विकास ही व्यक्ति अथवा सरकारी प्रशासन की सफलता का प्रतीक है। दोनों ही प्रशासनों का प्रगतिशील होना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है।

(4) अन्वेषण की आवश्यकता:-

निजी प्रशासन हो या लोक प्रशासन, दोनों में नवीन खोजों की प्रवृत्ति बनी रहनी चाहिए। समय निरन्तर बदलता रहता है। मान्यताएँ भी परिवर्तनशील होती हैं। सिद्धान्त भी परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। अतः निजी अथवा लोक प्रशासन की शक्ति तथा विकास के लिए वैज्ञानिक अन्वेषणों का महत्त्व समान है।

लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में अन्तर :-

 निजी प्रशासन तथा लोक प्रशासन में समानताएँ तो कम हैं, परन्तु अन्तर बहुत हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार है

(1) सत्तात्मक विभिन्नता:-

निजी प्रशासन में प्रबन्धकर्ता एक व्यक्ति या एक व्यक्ति समूह होता है। सम्पूर्ण प्रशासन की शक्ति उसी में केन्द्रित होती है, उसकी शक्ति सीमित होती है। परन्तु लोक प्रशासन में सरकार सत्ताधारी होती है, उसकी शक्ति व्यापक तथा असीमित होती है। समस्त निजी प्रशासन की सत्ताएँ लोक प्रशासन की सत्ता के अधीन होती हैं।

(2) क्षेत्रीय विभिन्नता:-

निजी प्रशासन का क्षेत्र सीमित तथा लघु होता है, जबकि लोक प्रशासन का क्षेत्र व्यापक तथा विस्तृत होता है। निजी प्रशासन में योजना कुछ सीमित व्यक्तियों के लाभार्थ बनाई जाती है। उसमें जन-कल्याण की भावना सीमित होती है, जबकि लोक प्रशासन में सम्पूर्ण जनता के हित के लिए योजना का निर्माण होता है। सम्पूर्ण जनता का कल्याण लोक प्रशासन के अन्तर्गत आता है।

(3) उद्देश्य में विभिन्नता :-

दोनों प्रशासनों में उद्देश्य की भी विभिन्मता होती है। लोक प्रशासन का उद्देश्य सम्पूर्ण जनता की सेवा करना है। लोक हित' का उद्देश्य ही लोक प्रशासन का मुख्य उद्देश्य होता है, जबकि निजी प्रशासन में व्यक्तिगत या एक वर्ग विशेष का हित ही निहित होता है। व्यक्तिगत या कुछ व्यक्तियों के समूह का लाभ ही निजी प्रशासन का मुख्य उद्देश्य होता है।

(4) उत्तरदायित्व में विभिन्नता :-

निजी प्रशासन एक व्यक्ति या एक वर्ग के प्रति उत्तरदायी होता है, जबकि लोक प्रशासन जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। क्षेत्र के अनुसार ही लोक प्रशासन का उत्तरदायित्व भी व्यापक तथा कठिन होता

(5) कार्य-प्रणाली में विभिन्नता:-

निजी प्रशासन तथा लोक प्रशासन की कार्य-प्रणाली भिन्न होती है। सहयोग की भावना लोक प्रशासन की आत्मा होती है। लोक प्रशासन के अन्तर्गत समस्त विभागों में सहयोग की भावना कार्य करती है। निजी प्रशासन ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा तथा प्रतियोगिता की भावना से ओतप्रोत होता है। लोक प्रशासन के पीछे सरकार की शक्ति होती है, जो अपने नियमों को जनता द्वारा जबरदस्ती मनवाने का कार्य करती है। इसीलिए लोक प्रशासन की प्रणाली अधिकार सम्पन्नता रखती है। निजी प्रशासन की प्रणाली में यह गुण नहीं होता है।

(6) प्रभावित तत्त्वों में अन्तर:-

लोक प्रशासन में राजनीतिक दलों का प्रभाव रहता है। प्रशासन उसी दल विशेष के निर्देशन पर चलता है जो विधानमण्डल में बहुमत में होता है। उसी दल की नीतियाँ सरकारी नीतियाँ बन जाती हैं। इसके विपरीत निजी प्रशासन में राजनीतिक तत्त्वों का प्रभाव नहीं रहता है। उसकी नीतियों पर सरकारों के बदलने का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता है। निजी प्रशासन व्यक्ति विशेष या समिति विशेष की इच्छा पर आधारित होता है, उस पर बाह्य प्रभाव नहीं पड़ता है।।

(7) दक्षता तथा निपुणता में अन्तर:-

कुछ विद्वानों का मत है कि निजी प्रशासन लोक प्रशासन की अपेक्षा अधिक दक्ष तथा निपुण होता है। लोक प्रशासन में कर्मचारीगण इतने उत्साह और लगन से कार्य नहीं करते जितने निजी प्रशासन के अन्तर्गत कार्य करने वाले कर्मचारीगण करते हैं। व्यक्तिगत स्वार्थ भी निजी प्रशासन को अधिक कुशल बना देता है, जबकि सार्वजनिक लाभ के पीछे लोगों की उपेक्षावृत्ति रहती है, जो उन्हें अकुशल बना देती है।

(8) योजनाओं के भविष्य में अन्तर :-

लोक प्रशासन में जो योजनाएँ बनाई जाती हैं, उनको पूरा करने के लिए भरसक प्रयत्न किया जाता है। यदि योजना को पूरा करने में बाधाएँ आती हैं, तो विशेषज्ञों को आमन्त्रित किया जाता है। ये विशेषज्ञ वाद-विवाद कर उन योजनाओं को पूर्ण करने के लिए नई-नई युक्तियाँ निकालते हैं। इस प्रकार लोक प्रशासन में योजनाओं का भविष्य उज्ज्वल होता है। परन्तु निजी प्रशासन में कठिनाई उत्पन्न होने पर योजनाओं को अपूर्ण छोड़ दिया जाता है। उनके साधन सीमित होते हैं, अतः उनकी योजनाओं का भविष्य अन्धकारमय होता है।

(9) जनता की दोनों के प्रति धारणा :-

लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन जनसम्पर्क पर ही चलता है। जनता दोनों प्रशासनों को एक दृष्टि से नहीं देखती। लोक प्रशासन के पीछे पशुबल होता है, उसके आदेश विवशकारी होते हैं। अतः सरकारी आदेश अच्छे हों या बुरे, जनता को मानने पड़ते हैं। निजी प्रशासन के आदेश विवशकारी नहीं होते, उनके पीछे स्वेच्छा का भाव रहता है।

(10) कानूनी समानता में अन्तर :-

लोक प्रशासन में कानून की समानता प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान होती है। कानून के समक्ष सभी व्यक्ति समान होते हैं, पदोन्नति के नियम तथा शर्ते सबके लिए समान होती हैं । परन्तु निजी प्रशासन के नियमों-उपनियमों में निष्पक्षता का अभाव होता है। प्रबन्धकगण किसी कर्मचारी विशेष को अधिक लाभ पहुँचा सकते हैं।

(11) वित्तीय क्षेत्र में विभिन्नता :-

लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन के वित्तीय क्षेत्र में भी व्यापक अन्तर है। लोक प्रशासन मन्त्रिपरिषद् की देखरेख में कार्य करता है। मन्त्रिपरिषद् व्यवस्थापिका के अधीन होती है। लोक प्रशासन की योजना बजट के लिए व्यवस्थापिका की ओर देखती है। निजी प्रशासन में यह कठोरता नहीं पाई जाती है। निजी प्रशासन के प्रबन्धक स्वयं ही मालिक होते हैं , और अपनी योजनाओं पर धन व्यय करने में स्वतन्त्र होते हैं। उन्हें किसी की स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

(12) स्थायित्व में अन्तर :-

लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन में सेवाओं के स्थायित्व में भी अन्तर होता है। निजी प्रशासन में कर्मचारियों की सेवा को कोई स्थायित्व प्राप्त नहीं होता। वह कभी भी अपने पद से च्युत किया जा सकता है। लोक प्रशासन में सामान्यतया कर्मचारियों के पद स्थायी होते हैं। उन्हें बिना सफाई दिए नौकरी से पृथक् नहीं किया जा सकता।
संक्षेप में, कुछ विद्वान् निजी प्रशासन को लोक प्रशासन से अधिक दक्ष तथा निपुण समझते हैं, परन्तु यदि उसका क्षेत्र बढ़ जाए, तो उसमें भी लोक प्रशासन की बुराइयाँ उत्पन्न हो जाएँगी। लोक प्रशासन के अन्तर्गत जनहितकारी कार्य होते हैं, जो उसे उच्च कोटि प्रदान करते हैं। लोक प्रशासन सभ्यता के विकास में भी सहायक होता है।

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