अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव - शक्ति एवं कार्य

B. A. II, Political Science II

प्रश्न 8. संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव किस प्रकार होता है, ? उसकी शक्तियों का परीक्षण कीजिए।

अथवा "संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की शक्तियाँ पिछले वर्षों में बढ़ती गई हैं।" विवेचना कीजिए।

अथवा '' संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की चयन प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

अथवा "अमेरिकी राष्ट्रपति संसार का सर्वाधिक शक्तिशाली संवैधानिक शासक है।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।

अथवा '' संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति के पद, शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।

अथवा "अमेरिका का राष्ट्रपति संसार का सबसे महान् शासक हो गया है।" इस कथन के सन्दर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर - प्रो. ऑग के अनुसार, अमेरिका का राष्ट्रपति संसार का सबसे महान् शासक हो गया है।" अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि अमेरिकी संघ की कार्यपालिका शक्ति एक राष्ट्रपति में निहित होगी।परन्तु अमेरिका के संविधान निर्माता राष्ट्रपति को इतना अधिक शक्तिशाली नहीं देखना चाहते थे, जितना शक्तिशाली राष्ट्रपति आज है।

america ke rashtrapati ka chunav

अमेरिका के राष्ट्रपति का निर्वाचन

अमेरिकी शासन व्यवस्था भारत की भाँति संसदीय शासन प्रणाली न होकर अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली है। वहाँ शासन की वास्तविक कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से न होकर अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। पहले जनता द्वारा निर्वाचक मण्डल का चुनाव किया जाता है, जिसमें 538 सदस्य (3 कोलम्बिया से,435 प्रतिनिधि सभा से एवं 100 सीनेट से) होते हैं। 

तद्परान्त एक निश्चित तिथि को निर्वाचक मण्डल के प्रतिनिधियों द्वारा राज्यों की राजधानियों में मतदान किया जाता है । इसके पश्चात् मतों की गणना की जाती है और प्रमाणीकृत करने के बाद सीनेट के अध्यक्ष के पास भेज दिया जाता है। सीनेट का अध्यक्ष कांग्रेस के दोनों सदनों की संयुक्त भैठक में मतगणना कर चुनाव परिणाम की घोषणा करता है । नवनिर्वाचित राष्ट्रपति 20 जनवरी को 4 वर्ष के लिए पद ग्रहण करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियाँ तथा कार्य

लॉर्ड ब्राइस ने अमेरिकी राष्ट्रपति को 'निर्वाचित सम्राट्' कहा है, जो राज्य , और शासन, दोनों करता हैमुनरो ने कहा है कि अब तक लोकतन्त्र में किसी भी व्यक्ति ने इतनी अधिक सत्ता का प्रयोग नहीं किया जितना कि अमेरिका का राष्ट्रपति करता है।" अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करके संसार के सबसे शक्तिशाली निर्वाचित पद का सृजन किया है। राष्ट्रपति राज्य तथा शासन का प्रधान होने के कारण संसार का सबसे महान् शासक हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियों को निम्नलिखित शीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है

(I) कार्यपालिका शक्तियाँ

संविधान के अनुसार समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति को प्रदान की गई हैं। कार्यपालिका का प्रधान होने के नाते राष्ट्रपति को प्रशासन संचालन के क्षेत्र में निम्नलिखित व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं

(1) प्रशासन का संचालन

देश के प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होने के नाते राष्ट्रपति प्रशासन का संचालन करता है। प्रशासन के इस उत्तरदायित्व को निभाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश, आदेश, नियम तथा उप-नियम जारी किए जाते हैं।

(2) कानूनों को लागू करना और व्यवस्था बनाए रखना

राष्ट्रपति का यह भी उत्तरदायित्व है कि वह देखे कि संघीय कानूनों और सन्धियों का पालन ठीक प्रकार से हो रहा है अथवा नहीं। इस कार्य में राष्ट्रपति को अटॉर्नी जनरल सा संघीय कर्मचारियोंन्याय विभाग व सेना से पूरी सहायता मिलती है।

(3) नियक्ति तथा पदच्युति की शक्ति

राष्ट्रपति विभिन्न पदाधिकारियों की नियुक्ति व पदविमुक्ति करने का अधिकार रखता है । राजदूत, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, सेना के उच्चाधिकारियों तथा संघीय न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। राष्ट्रपति सीनेट की सहायता से उच्च पदों पर नियुक्ति करता है। उन सभी अधिकारियों को, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, राष्ट्रपति हटा भी सकता है।

सामान्य रूप से सीनेट राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित नियुक्तियों का अनुमोदन कर देती है, जिसे 'सीनेट का शिष्टाचार' कहते हैं। कभी-कभी सीनेट इस शिष्टाचार का पालन नहीं करती है।

(4) सशस्त्र सेनाओं का प्रधान-

अमेरिकी राष्ट्रपति तीनों सेनाओं (जल, थल व वायु) का सर्वोच्च सेनापति है। सेना के समस्त अधिकारियों को सीनेट की स्वीकृति से वही नियुक्त करता है। राष्ट्रपति ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है जिसके कारण कांग्रेस को युद्ध की घोषणा करने के लिए विवश होना पड़े। सर्वोच्च सेनापति होने के नाते वही यह निश्चित करता है कि सेनाएँ कहाँ एकत्र हों, हवाई तथा जहाजी बेड़े कहाँ स्थापित किए जाएँ।

(5) परराष्ट्र सम्बन्धों का संचालन-

अमेरिकी राष्ट्रपति ही विदेश नीति का निर्धारण एवं संचालन करता है। न्यायाधीश मार्शल ने कहा था, “राष्ट्रपति ही वैदेशिक मामलों में राष्ट्र का प्रमुख वक्ता तथा विदेशी राष्ट्रों के लिए एकमात्र प्रतिनिधि है। परराष्ट्र सम्बन्धों के निर्धारण में राष्ट्रपति निम्न कार्य करता है

(i) राजदूतों एवं अन्य प्रतिनिधियों को नियुक्त करता है।

(ii) सन्धियाँ एवं समझौते करता है।

(iii) विदेशी सरकारों को मान्यता देता है।

(iv) विदेशों में अमेरिकी नागरिकों के संरक्षण की व्यवस्था करता है।

(v) विभिन्न देशों को आर्थिक एवं सैन्य सहायता देने के लिए कांग्रेस को

(vi) विदेश यात्राएं करता है।

(vii) विशेष दूतों को भेजकर गुप्त वार्ताएँ करता है।

(6) क्षमादान का अधिकार-

अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भाँति संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति को भी क्षमादान देने तथा दण्ड को स्थगित या कम करने का अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रपति द्वारा एक ही प्रकार के अपराध में दण्डित अनक व्यक्तियों को सर्वक्षमा भी प्रदान की जा सकती है।

(II) विधायी शक्तियाँ-

अमेरिका में शक्ति पृथक्करण के कारण राष्ट्रपति को प्रत्यक्ष रूप से विधायी शक्तियाँ प्राप्त नहीं हैं, पर राष्ट्रपति विधि-निर्माण के क्षेत्र में अपने व्यापक प्रभाव एवं शक्ति का प्रयोग करता है। इसी कारण कुछ विचारक उसे 'प्रधान विधायक' (Chief Legislator) कहने लगे हैं। पीटर का कहना है, “संविधान ने राष्ट्रपति को विधायी प्रक्रिया के प्रारम्भ और अन्त का स्थान दिया है।विधायी क्षेत्र में राष्ट्रपति को निम्न अधिकार प्राप्त हैं

(1) कांग्रेस को सन्देश भेजना-

राष्ट्रपति कांग्रेस को लिखित एवं मौखिक रूप से सन्देश भेजकर आवश्यक समस्याओं की ओर कांग्रेस का ध्यान आकर्षित करता है और आवश्यक कानूनों के निर्माण की सिफारिश करता है।

(2) कांग्रेस का विशेष अधिवेशन बुलाना-

संविधान के अनुसार यदि कोई महत्त्वपूर्ण या अति आवश्यक स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो राष्ट्रपति को कांग्रेस का विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है या वह चलते हुए अधिवेशन को बढ़ाने की सिफारिश कर सकता है।

(3) निषेधाधिकार शक्ति-

विधायी क्षेत्र में राष्ट्रपति की सबसे महत्त्वपूर्ण शक्ति निषेधाधिकार शक्ति या 'वीटो शक्ति' है। कांग्रेस द्वारा पारित विधेयक पर जब राष्ट्रपति अस्वीकृति के अधिकार का प्रयोग करता है, तो उसे निषेधाधिकार कहा जाता है।

यह दो प्रकार का होता है-(i) विलम्बकारी निषेधाधिकार, तथा (ii) जेबी निषेधाधिकार।

विलम्बकारी निषेधाधिकार के अन्तर्गत राष्ट्रपति विधेयक पर बिना वीटो का प्रयोग करे ही विधेयक को समाप्त करने में समर्थ होता है।

जब अमेरिकी कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा होता है, तो राष्ट्रपति को विधेयक पर विचार करने के लिए 10 दिन मिलते हैं। यदि 10 दिनों के अन्दर ही अधिवेशन समाप्त हो जाए और राष्ट्रपति ने उस पर न तो स्वीकृति और न । अस्वीकृति प्रदान की हो, तो यह माना जाता है कि विधेयक राष्ट्रपति के पास ही पड़ा है। इसी को जेबी निषेधाधिकार' (Pocket Veto) कहते हैं।

(4) कार्यपालिका आदेश-

राष्ट्रपति को शासन से सम्बन्धित आदेशों को जारी करने का अधिकार प्राप्त है। कांग्रेस द्वारा प्रदान की गई शक्तियों के अन्तर्गत राष्ट्रपति इस प्रकार के आदेश जारी करता है। इसे 'प्रदत्त व्यवस्थापन' या अध्यादेश की शक्ति के नाम से भी पुकारा जाता है।

(III) न्यायिक शक्तियाँ-न्यायिक क्षेत्र में राष्ट्रपति को दो प्रमुख शक्तियाँ प्राप्त हैं

(1) न्यायाधीशों की नियुक्ति करना

सीनेट की सहमति से राष्ट्रपति समस्त संघीय न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है, किन्तु वह उन्हें पदच्युत नहीं कर सकता।

(2) क्षमादान करना-

इस शक्ति के अन्तर्गत राष्ट्रपति केवल संघीय कानूनों से दण्डित अपराधियों को भाफ कर सकता है, किन्तु महाभियोग द्वारा दण्डित अपराधियों को माफ नहीं कर सकता । राष्ट्रपति व्यक्तिगत एवं सामूहिक अपराधियों को क्षमादान प्रदान कर सकता है।

(IV) दलीय नेता के रूप में शक्तियाँ

राष्ट्रपति अपने दल का प्रभावशाली नेता होता है। इस कारण दल की महत्त्वपूर्ण नियुक्तियों में तथा दल की महत्त्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में उसका प्रमुख हाथ रहता है। यदि किसी समय कांग्रेस के दोनों सदनों में उसके ही दल का बहुमत होता है, तो उसे कांग्रेस से विधि-निर्माण, नियुक्तियों एवं सन्धियों की स्वीकृति तथा विदेशी सहायता के लिए मांगी गई धनराशि को स्वीकृत कराने में कोई कठिनाई नहीं होती है।

(V) वित्तीय शक्तियाँ-

अमेरिका के संविधान ने कांग्रेस को वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की थीं, परन्तु व्यवहार में अब राष्ट्रपति इस सम्बन्ध में अधिक शक्तिशाली बन गया है। आय-व्यय का वार्षिक बजट राष्ट्रपति की देखरेख में तैयार किया जाता है तथा बजट कांग्रेस के द्वारा राष्ट्रपति ही पारित करता है। ऑग रे ने लिखा है,“बजट तथा एकाउण्टिंग एक्ट, 1921 के अनुसार राष्ट्रपति बजट का संचालक ही नहीं, अपितु सरकार का वास्तविक कारोबार करने वाला प्रबन्धक बन चुका है।

(VI) संकटकालीन शक्तियाँ-

अमेरिका के संविधान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संकटकाल में राष्ट्रपति को क्या शक्तियाँ प्राप्त हैं, परन्तु व्यवहार में संकटकाल के समय समस्त शक्तियाँ राष्ट्रपति में केन्द्रित हो जाती हैं। इसका कारण यह है कि पिछले वर्षों में अमेरिका अनेक संकटों से गुजरा है। इसी कारण समय-समय पर राष्ट्रपति ने विविध प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त कर लीं। गृह युद्ध के समय राष्ट्रपति लिंकन ने विद्रोह को दबाना ही अपना प्रमुख कर्तव्य समझा। 

इसी कारण उन्होंने 'बन्दी प्रत्यक्षीकरण लेख' को स्थगित कर दिया। उन्होंने अनेक ऐसी शक्तियों का प्रयोग किया जो संविधान द्वारा प्रदत्त नहीं थीं। इसी प्रकार अन्य राष्ट्रपतियों ने भी कांग्रेस को विश्वास में लेकर तानाशाही शक्तियों का प्रयोग किया। अमेरिका में न्यायिक निर्णयों में कहा गया है कि संकटकाल के समय राष्ट्रपति के पास विशेष शक्तियाँ होना आवश्यक है। 

इस सम्बन्ध में विल्सन ने लिखा है, “वह इतना बड़ा आदमी बनने के लिए स्वतन्त्र है जितना कि वह बनने की क्षमता रखता है। राष्ट्रपति विशेष परिस्थिति में संकटकाल की घोषणा कर सकता है। राष्ट्रपति युद्ध के समय देश के समस्त संसाधनों, औद्योगिक क्षेत्रों और मानवीय शक्ति पर नियन्त्रण रख सकता है।

निष्कर्ष

अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्रपति है। स्ट्रांग के शब्दों में कहा जा सकता है कि विश्व के अन्य किसी भी संवैधानिक राज्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के समान व्यापक शक्तियों वाला कोई पदाधिकारी नहीं है।" कभी-कभी प्रश्न उठाया जाता है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति तानाशाह है ?"

अमेरिकी संविधान द्वारा निरंकुशता की प्रवृत्ति को रोकने के लिए शक्ति पृथक्करण के साथ-साथ नियन्त्रण और सन्तुलन के सिद्धान्त को भी अपनाया गया है, इसीलिए राष्ट्रपति पर कांग्रेस का नियन्त्रण बना रहता है। फाइनर ने इन दोनों की अन्तर्निर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियाँ एक बैंक नोट के दो भागों की भाँति हैं, जिसमें प्रत्येक दूसरे के बिना व्यर्थ है।" अत: अमेरिका का राष्ट्रपति तानाशाह नहीं है। राष्ट्रपति की शक्तियाँ उसके व्यक्तित्व पर निर्भर हैं।

 

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