स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष लोकतंत्र

B. A. II, Political Science II

प्रश्न 16. “स्विट्जरलैण्ड प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) का घर है।" विवेचना कीजिए।

अथवा ''स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) की सफलता के क्या कारण हैं ?

अथवा ''स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) के उपकरणों का मूल्यांकन कीजिए।

अथवा ''स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) की संस्थाओं के कार्यकरण पर एक निबन्ध लिखिए।

अथवा "स्विट्जरलैण्ड प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) की जन्मभूमि है।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।

अथवा ''स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) के सफल संचालन के कारणों की विवेचना लिखिए। कीजिए।

उत्तर- 

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) से अभिप्राय

प्रजातन्त्र शासन, जिसमें शासन किसी वर्ग विशेष में न रहकर सभी व्यक्तियों अर्थात् समाज में निहित रहता है, दो प्रकार का हो सकता है

(1) प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र), तथा (2) अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र) ।

जहाँ अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में प्रतिनिधियों के माध्यम से जनता का शासन होता है, उही प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता विधि-निर्माण व प्रशासन के लिए अपने प्रतिनिधि न चुनकर इन कार्यों को स्वयं पूरा करती है। आज राज्यों के आकार व जनसंख्या में वृद्धि होने के कारण प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र असम्भव हो गया है। फिर भी स्विट्जरलैण्ड एक ऐसा देश है जहाँ आज भी प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र प्रचलित है।

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष लोकतंत्र

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र (लोकतंत्र)

स्विट्जरलैण्ड के एक पूर्ण कैण्टन तथा चार अर्द्ध-कैण्टनों में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र प्रचलित है। स्विट्जरलैण्ड के अन्य कैण्टनों और संघीय क्षेत्र में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र है, किन्तु इन कैण्टनों में भी प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के साधनों का जिस विशाल पैमाने पर प्रयोग होता है, वह अत्यन्त दुर्लभ है। स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के सम्बन्ध में ब्रुक्स ने लिखा है, “स्विट्जरलैण्ड राजनीति के साहसपूर्ण कार्यों की प्रयोगशाला है और उसकी सफलता से समस्त प्रजातन्त्रीय देशों को शिक्षा मिलती है।"

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था के कारण ही स्विट्जरलैण्ड को 'प्रजातन्त्र का घर' माना जाता है। ब्राइस के शब्दों में कहा जा सकता है कि विश्व के आधुनिक लोकतन्त्रों में, जो कि वास्तविक लोकतन्त्र है, अध्ययन की दृष्टि से स्विट्जरलैण्ड का सर्वाधिक महत्त्व है।

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की निम्न संस्थाएँ कार्य करती हैं

(1) प्रारम्भिक सभाएँ या लैण्ड्सजीमाइण्ड

स्विट्जरलैण्ड के एक पूर्ण कैण्टन और चार अर्द्ध-कैण्टनों में प्रारम्भिक सभाओं की पद्धति प्रचलित है। इन कैण्टनों में कोई विधानमण्डल नहीं है और विधानमण्डल का कार्य प्रारम्भिक सभाओं द्वारा किया जाता है। इन कैण्टनों में 20 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले 'स्त्री-पुरुष वर्ष में एक बार खुले मैदान में सभा के रूप में एकत्रित होते हैं। सभा में कैण्टन के प्रत्येक नागरिक को भाग लेने, मत देने व भाषण देने का अधिकार होता है। इस सभा में अगले वर्ष तक के लिए प्रशासनिक कार्य चलाने हेतु एक कार्यकारिणी परिषद् का चुनाव किया जाता है, जिसका प्रधान 'लैण्ड्समैन' कहा जाता है। यह कार्यकारिणी परिषद् सभा के सम्मुख विगत वर्ष के प्रशासनिक कार्यों की रिपोर्ट और आगामी वर्ष के लिए बजट प्रस्तुत करती है। सभा बजट पारित करती है। यह सभा कैण्टन के न्यायाधीशों और अन्य सरकारी अधिकारियों तथा सीनेट के लिए प्रतिनिधि भी चुनती है। प्रारम्भिक सभाओं के द्वारा वे सभी अन्य कार्य भी किए जाते हैं जो अन्य कैण्टनों में विधानमण्डल करते हैं।

इस प्रकार प्रारम्भिक सभाओं वाले कैण्टनों में कोई विधानमण्डल अथवा प्रतिनिध्यात्मक सभाएँ नहीं हैं। समस्त राजनीतिक सत्ता का प्रयोग नागरिक प्रत्य। रूप से करते हैं।

(2) लोक निर्णय या जनमत संग्रह-

लोक निर्णय विधि-निर्माण के क्षेत्र में जनता का निषेधात्मक अधिकार है,जो व्यवस्थापिका को स्वेच्छानुकूल विधि-निर्माण का अधिकार नहीं देता। लोक निर्णय से अभिप्राय व्यवस्थापिका द्वारा पारित कानूनों को जनता के समक्ष उसकी स्वीकृति अथवा अस्वीकृति के लिए रखने से है। इस प्रकार लोक निर्णय एक ऐसा अस्त्र है जिसके द्वारा जनता अवांछनीय कानूनों को समाप्त कर देती है। लोक निर्णय दो प्रकार का होता है

(i) अनिवार्य लोक निर्णय

कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर कानून बनाकर विधानमण्डल को जनता की स्वीकृति लेनी ही होती है। स्विट्जरलैण्ड के संघीय संविधान में संशोधन करने के लिए अनिवार्य लोक निर्णय की व्यवस्था है।

(ii) ऐच्छिक लोक निर्णय

ऐच्छिक लोक निर्णय में किसी कानून पर उसी समय जनमत संग्रह कराया जाता है, जबकि मतदाताओं की एक निश्चित संख्या ऐसी माँग करे। इस सम्बन्ध में यह व्यवस्था की गई है कि किसी कानून या आदेश के प्रकाशन के 90 दिन के अन्दर यदि 50,000 नागरिक या 8 कैण्टन लोक निर्णय की माँग करें, तो उस पर लोक निर्णय कराया जाना आवश्यक है।

स्विट्जरलैण्ड के कैण्टनों में संविधान संशोधन सम्बन्धी विधेयकों पर अनिवार्य लोक निर्णय की व्यवस्था है। 10 पूर्ण कैण्टनों और 1 अर्द्ध-कैण्टन में साधारण कानूनों पर भी अनिवार्य लोक निर्णय की व्यवस्था है। 9 पूर्ण कैण्टन और 1 अर्द्ध-कैण्टन में साधारण कानूनों पर ऐच्छिक लोक निर्णय की व्यवस्था है।

(3) प्रस्तावाधिकार अथवा आरम्भक-

लोक निर्णय के द्वारा मतदाता किसी कानून को रद्द करवा सकते हैं, किन्तु इच्छानुसार कानून नहीं बनवा सकते । परन्तु प्रस्तावाधिकार अथवा आरम्भक के द्वारा जनता कानून बनाने के लिए विधानमण्डल से यह माँग कर सकती है कि या तो विधानमण्डल उस प्रस्ताव के आधार पर कानून का निर्माण करे अथवा उस पर लोक निर्णय लिया जाए। यह दो प्रकार का होता है

(i) सविन्यासित आरम्भक

इसके अन्तर्गत नागरिक स्वयं विधेयक का प्रारूप तैयार कर उसे विधानमण्डल के समक्ष रखते हैं, जिस पर लोक निर्णय लिया जाता है।

(ii) अविन्यासित आरम्भक-

इसके अन्तर्गत जनता विधानमण्डल के समक्ष कुछ निश्चित सिद्धान्त रखती है। यदि विधानमण्डल इन सिद्धान्तों से सहमत होता है,तो उनके आधार पर विधेयक निर्मित करता है। यदि विधानमण्डल इन सिद्धान्तों से असहमत हो, तो इन सिद्धान्तों को लोक निर्णय हेतु जनता के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता है। यदि जनता लोक निर्णय के द्वारा इन सिद्धान्तों को स्वीकार कर लेती है, तो विधानमण्डल उनके आधार पर विधेयक का प्रारूप तैयार कर इस प्रारूप को पुनः लोक निर्णय हेतु प्रस्तुत करता है।

संघीय शासन में प्रस्तावाधिकार अथवा आरम्भक केवल संवैधानिक संशोधनों के लिए ही अपनाया जाता है, साधारण कानूनों के लिए नहीं। एक लाख मतदाता संविधान में संशोधन की माँग कर सकते हैं।

जेनेवा नामक कैण्टन को छोड़कर,जहाँ केवल संवैधानिक प्रस्तावाधिकार की व्यवस्था है,शेष कैण्टनों में मतदातागण विधानमण्डल के समक्ष साधारण कानून व संविधान संशोधन, दोनों के ही सम्बन्ध में प्रस्तावाधिकार प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रस्तावाधिकार के प्रयोग की पद्धति सम्बन्धित कैण्टन के संविधान द्वारा ही निर्धारित की जाती है।

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के इन साधनों को अत्यन्त शिक्षाप्रद और नैतिक राजनीतिक युक्तियाँ माना गया है। यह भी कहा गया है कि प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र जनता की इच्छा का वास्तविक एवं सत्य प्रदर्शन है और दलबन्दी के दोषों से मुक्त है। प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र प्रत्येक नागरिक को राज्य कार्य में सहयोगी बनाता है, जिससे उनकी देशभक्ति की भावना सुदृढ़ होती है। इसके अतिरिक्त इसमें दल की ज्यादतियों अथवा निरंकुशता का भय भी नहीं होता।

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की सफलता के कारण

मुनरो ने स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की सफलता के सम्बन्ध में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा है,“यह ऐसा जनतन्त्र है जिसने अधिकांशतः उन दुर्गुणों को दूर रखा है जो जनतन्त्र की उपज समझे जाते हैं। अनेक तथ्य उसे भाग्यशाली बनाते हैं। इसका आंशिक कारण देश का छोटा आकार एवं सुदृढ़ता, उसकी सुरक्षित स्थिति तथा विविधताएँ हैं। स्विस नागरिकों की बुद्धिमत्ता, देशभक्ति एवं सद्भावना ही प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की सफलता का कारण है। उनमें सम्पत्ति का प्रायः समान वितरण तथा धनिक एवं दरिद्र के भेद की अनुपस्थिति वे दृढ़ आधार बनाती हैं जिन पर कोई भी शासन टिक सकता है।"

स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की सफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(1) भौगोलिक स्थिति

स्विट्जरलैण्ड एक अत्यन्त छोटा देश है और इसकी जनसंख्या तथा क्षेत्रफल, दोनों सीमित हैं। इसके कारण यहाँ लोक निर्णय आरम्भक आदि विधियों का सफलतापूर्वक प्रयोग हो सका है। वर्षों की भौगोलिक स्थिति ने भी प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की सफलता में सहायता पहुँचाई है। स्विट्जरलैण्ड पर्वतों तथा अन्य प्राकृतिक बाधाओं से घिरा हुआ है, जिसके कारण यहाँ की जनता सुरक्षा का अनुभव करती है।

(2) स्विस नागरिकों का चरित्र

स्विस नागरिक शिक्षित होने के साथ-साथ अत्यन्त उज्ज्वल चरित्र वाले रहे हैं। वे बड़े शान्तिप्रिय हैं और उनका चरित्र उदारता, व्यवहारकुशलता, विनम्रता, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यपरायणता, उत्तरदायित्व आदि गुणों से पूर्ण है। इन गुणों के कारण वे राजनीतिक तथा शासन सम्बन्धी कार्यों को अत्यन्त सावधानी एवं गम्भीरता से करते हैं।

(3) सामाजिक एवं आर्थिक समानता

स्विस प्रजातन्त्र की सफलता का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कारण वहाँ सामाजिक एवं आर्थिक विषमता का अभाव है। वहाँ ऊंच-नीच तथा धनी-निर्धन का भेदभाव नहीं है। इस कारण लोगों में पारस्परिक प्रेम, सद्भावना एवं सहयोग है।

(4) पेशेवर राजनीतिज्ञों तथा उग्र दलबन्दी का अभाव

अन्य प्रजातान्त्रिक देशों की भाँति स्विट्जरलैण्ड में पेशेवर राजनीतिज्ञ नहीं हैं और न ही वहाँ दलबन्दी का अत्यधिक प्रभाव है। अतएव स्विस राजनीति शान्त, स्वस्थ और भ्रष्टाचार रहित

(5) राष्ट्रीय एकता एवं देशप्रेम की प्रबल भावना-

स्विट्जरलैण्ड में अनेक विभिन्नताओं के होते हुए भी वहाँ राष्ट्रीयता एवं देशप्रेम की भावना की प्रबलता के कारण वहाँ के निवासी निजी स्वार्थ की तुलना में राष्ट्रीय हित एवं देश हित को अधिक महत्त्व देते हैं।

(6) स्विट्जरलैण्ड की तटस्थ नीति-

1815 ई. की वियना कांग्रेस से ही स्विट्जरलैण्ड तटस्थ विदेश नीति का पालन करता चला आ रहा है। अतः अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के दुष्प्रभावों से वह सर्वथा मुक्त रहा है। स्विट्जरलैण्ड की तरथता वहाँ प्रजातन्त्र के विकास में बहुत सहायक सिद्ध हुई है।

(7) स्थानीय स्वशासन की श्रेष्ठ व्यवस्था

स्थानीय स्वशासन प्रजातन्त्र का भाधार है। स्विट्जरलैण्ड में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था अन्य देशों की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ है और वहाँ स्थानीय स्वशासन की इकाइयाँ पर्याप्त स्वतन्त्र एवं मात्म निर्भर हैं। स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था ने स्विस नागरिकों को सार्वजनिक सार्यों का प्रशिक्षण प्रदान किया है और उनमें नागरिक दायित्व की भावना जाग्रत

(8) जन-प्रभुता को बनाए रखने की तीव्र आकांक्षा-

स्विट्जरलैण्ड के नागरिक लोक निर्णय व आरम्भक के द्वारा जनप्रतिनिधियों पर नियन्त्रण रखते हैं

और व्यवस्थापिका की भूलों तथा त्रुटियों को सुधारते हैं। वे लोकतन्त्र के सजग पहरी हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इस प्रकार जन-प्रभुता बनाए रखने की तीव्र आकांक्षा के कारण भी स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सफल रहा है।

 

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