संक्षेपण किसे कहते हैं ?

प्रश्न 16. संक्षेपण किसे कहते हैं ? एक अच्छे संक्षेपक में किन गुणों का होना आवश्यक है ?

अथवा ‘’ संक्षेपीकरण का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइये कि एक आदर्श संक्षेपक में किन गुणों का होना आवश्यक है ? 

अथवा ‘’ संक्षेपण के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए एक कुशल संक्षेपणकर्ता के गुणों का सविस्तार वर्णन कीजिये।

उत्तरसंक्षेपीकरण' शब्द का निर्माण संक्षेप से हुआ है, जिसका अर्थ है छोटा या लघु । इस आधार पर संक्षेपीकरण का अर्थ हुआ छोटा आकार।

इस प्रकार किसी विस्तृत कथन, अवतरण, भाषण, समाचार आदि को उसके वास्तविक तथ्यों के साथ सुनियोजित ढंग से असम्बद्ध,अनावश्यक और अप्रासंगिक. अंशों का परित्याग करते हुए संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने की क्रिया संक्षेपीकरण' कहलाती है। 

वस्तुतः संक्षेपीकरण में अवतरण की ही भाषा में अथवा किंचित परिवर्तित भाषा में सारभूत तथ्यों को संक्षिप्त करके प्रस्तुत किया जाता है। संक्षेपण में शब्दों की संख्या मूल अवतरण के शब्दों की तिहाई होती है।

संक्षेपण किसे कहते हैं

संक्षेपक के गुण -

संक्षेपण का कार्य सरल नहीं है। अतः संक्षेपक को संक्षेपण करते समय बहुत सोच-विचार करना पड़ता है, ताकि मूल अवतरण का कोई प्रमुख अंश न छूट जाये। ऐसा करने हेतु संक्षेपक में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है-

1. कुशाग्र एवं तीव्र बुद्धि-संक्षेपणकर्ता को कुशाग्र एवं तीव्र बुद्धि का होना चाहिए, क्योंकि उस विषय को समझकर क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना होता है। इसके अलावा यह भी निर्णय लेना पड़ता है कि कौन-सा तथ्य छोड़ा जाए तथा कौन-सा रखा जाये ? यह तभी सम्भव है, जब उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता हो।

2. एकाग्रता-संक्षेपणकर्ता का चित्त एकाग्र होना चाहिए । चंचल चित्त वाले व्यक्ति कुशल संक्षेपक नहीं हो सकते हैं।

3. अध्ययनशील-कुशल संक्षेपक को अध्ययनशील होना चाहिए, ताकि वह मूल पाठ का अध्ययन कर महत्त्वपूर्ण तथ्यों का चयन कर सके तथा यह भी निर्णय कर सके कि संक्षिप्त रूप में किन बातों को स्थान देना है तथा किनको नहीं ?

4. शीर्षक चुनने की योग्यता-मूल पाठ का संक्षेपीकरण करने के पश्चात् उसका शीर्षक रखना भी आवश्यक होता है । शीर्षक के चयन से भी संक्षेपक की कुशलता का आभास होता है। अतः संक्षेपक को चाहिए कि मूल पाठ के प्रत्येक शब्द तथा वाक्य का गम्भीर अध्ययन करने के पश्चात् मूल पाठ का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्षक रखे।

5. संक्षिप्तता की कुशलता-मूल पाठ को पढ़कर तथा उसके केन्द्रीय विचार को ग्रहण करके क्रमबद्ध रूप से लिखने की कला में संक्षेपक को कुशल होना चाहिए। इसके लिए उसमें रचनात्मक तथा सृजनात्मक शक्ति का होना अनिवार्य है।

6. भाषा का ज्ञान-इसके अभाव में उसे विषय-वस्तु का पूर्ण ज्ञान तथा मुहावरों आदि को समझना कठिन हो जायेगा। अतः दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि संक्षेपक का भाषा पर पूर्ण अधिकार होना चाहिए।

7. धैर्यवान-संक्षेपक का धैर्यवान होना आवश्यक है, क्योंकि मूल पाठ के अध्ययन शब्दों की गणना तथा मुख्य विचारों का संकलन करने के लिए धैर्य की . आवश्यकता होती है, जिसके अभाव में आदर्श संक्षेपण सम्भव नहीं है।

 

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